आये जो उसका नाम तो तैयार कौन है।
चेहरे बदल-बदल के वो बर्बाद कर गया
हम सोचते ही रह गए की किरदार कौन है।
तुम ज़ख्म ले तो आये हो बाजार में मगर
ये भी तो देख लो खरीददार कौन है।
दी बार-बार किसने मेरे दिल पे दस्तकें,
चीखा में बार-बार की इसबार कौन है।
तस्वीर की ज़ुबान तो बहोत बोलते हो तुम,
अब तुम से गुफ्तगू का तलबगार कौन है।
- कुंवर रंजीत चौहान









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